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इंडियन बैंक को महिला आयोग का नोटिस, गर्भवती महिला को ड्यूटी के लिए अनफिट बताया था

इंडियन बैंक को दिल्ली महिला आयोग ने एक नोटिस भेजा है। जिसमें यह आरोप है कि इंडियन बैंक ने एक गर्भवती महिला को ड्यूटी के लिए अनफिट बताते हुए अस्थाई रूप से अयोग्य करार दिया है। जिसके बाद महिला आयोग ने नोटिस भेज कर बैंक को ये दिशा निर्देश वापस लेने को कहा है। बैंक के इस कदम के बाद कई संगठन इसकी कड़ी आलोचना कर रहें है लेकिन बैंक की तरफ से इस मामले में अभी तक कुछ नही कहा गया है।

वहीं दिल्ली महिला आयोग ने इस मामले को भेदभावपूर्ण और अवैध बताया है। उनका मानना है कि यह ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020’ के तहत प्रदान किए गए मातृत्व लाभ के विपरीत है।

महिला आयोग ने  नोटिस में क्या कहाः

इंडियन बैंक के इस कदम पर महिला आयोग ने आगे कहा , “यह लिंग के आधार पर भेदभाव करता है जो भारत के संविधान के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों के खिलाफ है।” आयोग ने इंडियन बैंक को नोटिस जारी किया कर कहा कि बैंक नए महिला विरोधी दिशानिर्देशों को वापस ले। बता दें कि महिला आयोग ने इस मामले के संदर्भ में भारतीय रिज़र्व बैंक को भी पत्र लिखा हैं।

डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल का कहना है कि इंडियन बैंक द्वारा कर्मचारियों की भर्ती के नए दिशानिर्देशों पर उनके पैनल ने स्वत: संज्ञान लिया है। साथ ही 23 जून तक मामले पर कि जाने वाली कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट सौपंने को भी कहा है।

गवर्नर को भी लिखा पत्रः

अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर को भी पत्र लिखा है। उन्होंने आरबीआई के गवर्नर से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया हैं। आयोग ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बैंक द्वारा हाल में जारी एक परिपत्र के तहत नियत प्रक्रिया के माध्यम से चुने जाने के बावजूद उन महिलाओं को सेवा में शामिल होने से रोक दिया गया है जो तीन महीने से अधिक की गर्भवती हैं।

उसने आगे कहा की, ‘‘बैंक ने नियम बनाए हैं जिनमें कहा गया है कि यदि कोई महिला उम्मीदवार तीन महीने की गर्भवती है तो उसे ‘अस्थायी रूप से अयोग्य’ माना जाएगा और वह चयन होने के बाद भी तत्काल कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाएगी। इससे उनके नौकरी शुरू करने में देरी होगी और बाद में वे अपनी वरिष्ठता खो देंगी।’’

SBI ने भी लिया था ऐसी ही फैसला फिर बदलना पड़ाः

गौरतलब है कि इससे पहले जनवरी में भारतीय स्टेट बैंक ( SBI ) ने भी इसी प्रकार के नियम लागू किए थे। नियमों के तहत तीन माह से अधिक अवधि की गर्भवती महिला उम्मीदवारों को ‘‘अस्थायी रूप से अयोग्य’’ माने जाने की बात कही गई थी। इस प्रावधान को श्रमिक संगठनों और दिल्ली के महिला आयोग समेत समाज के कई तबकों ने महिला-विरोधी बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी। इसके बाद एसबीआई को इस नियम को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा था।

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