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कभी जय-वीरू जैसे दोस्त थे ये क्रिकेटर लेकिन बन बैठे ‘दुश्मन’ जानिए क्या थी वजह…….

शिवानी ओझा।

लड़ाई-झगड़े तो खेल के एक हिस्से के समान ही है। बेशक, मैदान पर नोकझोंक देखने को मिलती हो लेकिन खेल समाप्त होते-होते उस नोकझोंक को लगभग भूला दिया जाता है खासकर क्रिकेट में। ऐसी कई घटनाएं आपने देखे ही होंगे। लेकिन कई बार यही छोटे छोटे झगड़े बड़ा रूप ले लेते हैं। कई बार तो यह झगड़ा नुकसानदायक भी साबित होता है। आज हम इस वीडियो में ऐसे ही भारतीय क्रिकेटरों के बारे में बात करेंगे जो कभी शोले के ‘जय-वीरू’ के समान थे लेकिन बाद में एक-दूसरें के दुश्मन बन बैठे।

राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली

राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली दोनों भारतीय टीम के कप्तान रह चुके हैं। दोनों ने साथ में भारत के लिए कई मैच खेले हैं। कई मैचों में जीत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। एक समय था जब लोग दोनों में की छवि देखते थे लेकिन ये भ्रम जल्द ही टूट गया। वर्ष 2011 में एक इंटरव्यू में गांगुली ने द्रविड़ को घेर ही लिया। मामला, कोच ग्रेग चैपल वाला था। गांगुली ने कहा- राहुल द्रविड़ ऐसे व्यक्ति हैं, जो चाहते हैं कि हर चीज ठीक से चलती रहे। वे जानते थे कि कई चीजें गलत हो रही थी, लेकिन उनमें चैपल से ये कहने की हिम्मत नहीं थी कि वे गलत कर रहे हैं।

इस लिस्ट में अगल नाम आता है नवजोत सिंह सिद्धू और मोहम्मद अजहरुद्दीन की

वर्ष 1996 की बात हैं। इंग्लैंड दौरे पर गई नवजोत सिंह सिद्धू सीरीज को बीच में छोड़कर भारत चले आए थे। उन्होंने उस समय के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन से विवाद की वजह से यह कदम उठाया था। सिद्धू ने अजहर पर अत्याचार और बुरा व्यवहार करने का आरोप लगाया था। हालांकि बाद में मोहम्मद अजहरुद्दीन ने संवाद की कमी को इस विवाद की वजह करार दिया था।

इस लिस्ट में अगल नाम आता है विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर का

विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर दोनों बचपन के मित्र रहे हैं। दोनों बचपन में एक साथ क्रिकेट खेलने जाया करते थे। जहां सचिन ने टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की करते हुए सर्वश्रेठ क्रिकेटर बनकर उभरे तो वहीं विनोद कांबली फिसड्डी साबित हुए। विनोद कांबली ने टीम से कई बार बाहर और अंदर हुए। लेकिन वह एक भी बार अपनी जगह पक्की करने में कामयाब नहीं हो पाए। कांबली ने बाद में आरोप लगाया कि उनके कप्तान, टीम के साथी, चयनकर्ता और क्रिकेट बोर्ड की वजह से उनका करियर बर्बाद हुआ। एक टीवी शो में कांबली ने बचपन के दोस्त सचिन तेंदुलकर के लिए भी कहा कि मुश्किल वक्त में सचिन ने उनका साथ नहीं दिया। सचिन ने अपनी रिटायरमेंट स्पीच में कांबली का नाम नहीं लिया था तो इसे लेकर भी कांबली दुखी नजर आए।

अगल नाम आता है दिनेश कार्तिक और मुरली विजय

कहावत है अगर प्यार दोस्ती के बीच में आ जाए तो दोस्ती में दरार आ जाती है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दिनेश कार्तिक और मुरली विजय हैं। कभी ये दोनों पक्के दोस्त हुआ करते थे, लेकिन दोनों की दोस्ती उस वक्त खत्म हो गई जब दिनेश को पता चला कि उनकी पत्नी और मुरली विजय का अफेयर चल रहा हैं। इसको लेकर दिनेश और निकिता का तलाक हो गया। तलाक होने के बाद मुरली विजय ने निकिता से शादी कर ली।

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