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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने जैन विद्या एवं प्राकृत,अपभ्रंश भाषा के महामनीषी 97 वर्षीय श्रुताराधक प्रो . राजाराम जैन जी को पद्मश्री सम्मान से नवाजने की घोषणा ,समस्त जैन दर्शन एवं प्राकृत ,संस्कृत एवं प्राच्य विद्या जगत के लिए बहुत ही गौरव का क्षण है ।

उन्हें इस सम्मान की घोषणा से पूर्व ही श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय,नई दिल्ली के जैन दर्शन विभाग के आचार्य प्रो वीरसागर जैन जी ,प्रो अनेकांत कुमार जैन जी तथा प्राकृत विभाग की प्रो कल्पना जैन जी ने प्रो राजाराम जैन जी तथा उनकी धर्म पत्नी डॉ विद्यावती जैन जी का अभिनंदन उनके घर जाकर किया ।

ज्ञातव्य है कि उनकी धर्मपत्नी डॉ विद्यावती जैन जी उनके ही समान जैन विद्या एवं प्राकृत अपभ्रंश भाषा की विदूषी हैं । प्रो जैन वाराणसी के सुप्रसिद्घ स्याद्वाद महाविद्यालय के स्नातक हैं तथा गणेश वर्णी शोध संस्थान के अध्यक्ष हैं ।

इस अवसर पर प्रो अनेकांत कुमार जैन ने उनका संक्षिप्त साक्षात्कार भी लिया जिसमें उन्होंने कहा कि वो काम करना चाहिए जो किसी ने नहीं किया । मैंने राजस्थान और गुजरात के चक्कर लगा लगा कर पांडुलिपियां एकत्रित की हैं । उनका संपादन और अनुवाद किया है । मैंने आरा ,बिहार में 42 वर्ष तक प्राकृत का काम किया । आरा यह संक्षिप्त नाम है । उसका पूरा नाम था – आराम नगर । एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि जैन विद्या एवं प्राकृत भाषा आदि प्राच्य विद्या में विद्यार्थी इस लिए नहीं आते हैं क्यों कि यह बहुत कठिन है । उन्होंने अपने कई संस्मरण साझा किए । ज्ञातव्य है कि प्रो राजाराम जी ने जिस पासणाह चरिउ ग्रंथ का संपादन और अनुवाद किया है उसकी प्रशस्ति में दिल्ली और कुतुबमीनार का वास्तविक इतिहास प्राप्त होता है ।

जैन दर्शन विभाग के अध्यक्ष प्रो वीरसागर जी ने कहा कि आप कुन्दकुन्द भारती चलिए ,वहीं रहिए ताकि आपके ज्ञान का लाभ सभी लोग ले सकें ।

प्रो कल्पना जैन जी ने कहा कि आप हमें आशीर्वाद दीजिये ताकि हम भी आपकी तरह काम कर सकें ।

इस कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से वाराणसी के प्रो फूलचंद जैन जी एवं डॉ मुन्नी पुष्पा जैन जी तथा उदयपुर से प्रो प्रेमसुमन जैन जी ,नागपुर से प्रो भागचंद जैन जी ,मुम्बई से डॉ अरिहंत जैन जी ने जुड़कर उनका हार्दिक अभिनंदन किया एवं चर्चा की ।

इस अवसर पर प्रो वीरसागर जैन जी ने प्राकृत विद्या का अंक तथा अपना नवीन प्रकाशित ग्रंथ समर्पित किया ।

प्रो अनेकांत जैन ने उन्हें पागद भासा एवं प्राकृत टाइम्स का अंक एवं अपना प्राकृत ग्रंथ दसधम्मसारो समर्पित किया । प्रो कल्पना जैन ने अपना प्राकृत ग्रंथ आरामसोहा एवं साहित्य चिंतन समर्पित किया ।

इस अवसर पर स्वयं प्रो राजाराम जी एवं उनकी धर्मपत्नी डॉ विद्यावती जी ने अपनी नवीन प्रकाशित कृति महाकवि रइधू विरचित सिदंत्थसारो तथा जिमंधर जिण चरिउ का परिचय भी दिया और दर्शन भी करवाया ।

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