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परमाणु बम गिराए बिना अमेरिका ईरान से युद्ध नहीं जीत पाएगा
अमेरिका इजरायल और ईरान युद्ध में भारत ही अकेला देश है जो इजरायल , ईरान और खाड़ी देशों का एक समान विश्वासपात्र बनकर उभरा है l जब एशिया से लेकर यूरोप और अमेरिका तक ने अपने यहा पेंतीस प्रतिशत पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं l तब भी भारत में घरेलू गैस और पेट्रोल के दामों में मामूली वृद्धि ही की गई l ऐसे संकट काल में यह भारत की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है l भारत के विरोधी दलों और नेताओं को हमेशा देश के विरोध में और मोदी के विरोध में बोलने की आदत है l चाहे उसमें कोई तत्व या तथ्य ना हो l जिस समय नेता विपक्ष सरकार की विदेश नीति को विफल कह रहे थे l उस समय ईरान के विदेशमंत्री दिल्ली में सरकार से वार्ता कर रहे थे l भारत ईरान को कई प्रकार की राहत सामग्री भी भेज रहा हैं l सरकार सभी बातें खुलकर आम जनता में नहीं बता सकती क्योंकि इससे देश की सुरक्षा और विदेश नीति प्रभावित होती है l जबकि देश में कुछ विरोधी दल और नेता पाकिस्तान और चीन के एजेंटों की तरह काम कर रहे हो l विरोधी दलों ने ख़ामनेइ की मौत पर भी देश में जगह-जगह प्रदर्शन कर दंगे और अशांति फैलाने की कोशिश की थी l सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस खाड़ी युद्ध पर एक सर्वदलीय कमेटी का भी गठन कर दिया है l तब भी कुछ विपक्षी नेता संसद के बाहर कह रहे है कि इस विषय पर संसद में बहस होनी चाहिए l अरे भाई आपको जो कहना है इस कमेटी में अपने सुझाव रखिए l क्यों विश्व के सामने संसद में बहस कर अपने पत्ते खोले जाए ? संसद में खुली बहस होने पर वैश्विक स्तर पर देश की कूटनीति और विदेश नीति सबको पता लग जाएगी और इससे देश का फायदा तो नहीं नुकसान जरूर होगा l
भारत की कूटनीति और विदेश नीति के चलते ही खाड़ी देशों में प्रवासी भारतीय सुरक्षित हैं और घर वापसी भी संभव हो पा रही है l वही होरमुर्जू स्ट्रीट से भी गैस और तेल से भरे जहाज सुरक्षित निकलकर भारतीय तटों तक पहुंच रहे हैं l
एक महीना हो गया अमेरिका , इजरायल और ईरान युद्ध को चलते हुए जिसके फलस्वरूप विश्व के कई देशो में पेट्रोलियम पदार्थों की कमी के कारण कई परेशानियां उन देशों में हो रही है और मंहगाई बढ़ रहीं हैं l इसके बावजूद भारत में स्थिरता है l पूरे विश्व को अब पता लग चुका है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बड़बोले और अस्थिर विचारों वाले व्यक्तित्व है और पाकिस्तान उनका मोहरा है l इसीलिए पाकिस्तान को मध्यस्थता के लिए आता देख ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता से साफ इनकार कर दिया है l डोनाल्ड ट्रंप रोज कहते हैं कि ईरान समझौते के लिए गिड़गिड़ा रहा है l और ईरान तुरंत उसका खण्डन कर देता है l ऑपरेशन सिंदूर के युद्ध विराम पर नरेंद्र सरेंडर कहने वाले नेताओं को समझ में आ जाना चाहिए की डोनाल्ड ट्रंप की विश्व नेता की छवि तो ख़राब हो ही गई है, उनके अपने देश में भी लोग उनसे खुश नहीं है l और उनके विरोध में रोज प्रदर्शन हो रहे है l अगर वह अभी भी ट्रंप पर विश्वास करते हैं तो उन्हें राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए l
अमेरिका के मित्र देशों स्पेन, इटली, फ्रांस और नाटो देशों ने भी ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका इजराइल का सहयोग करने से मना कर दिया है l सबको ईरान की मिसाइलो से डर लग रहा है l ईरान ने जो खाड़ी के अन्य मुस्लिम देशों संयुक्त अरब अमीरात,सऊदी अरब , कुवैत ,कतर, ओमान, बहरीन आदि देशों पर हमला किया ये वही देश है , जिन्होंने अमेरिका को अपने यहां हवाई अड्डे बनाने दिए l और अमेरिका की सेना को, हवाई जहाजों को अपने यहां रहने के लिए शरण दी l अमेरिका इजराइल का सहयोग करने वाले सभी देशों पर ईरान बिना डरे मिसाइल बरसाएगा चाहे उसका परिणाम कुछ भी हो l ट्रंप रोज कह रहे हैं कि ईरान समझौते के लिए तैयार है तो दूसरी ओर ईरान पर हजार हजार किलो के बम गिरा रहे हैं और कह रहे हैं कि अभी युद्ध दो हफ्ते और चलेगा l ट्रंप जमीनी सैन्य अभियान की भी बात कर रहे हैं जिसके विरुद्ध ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका को चेतावनी भी दे दी है l सोचने की बात है कि जिस ईरान के पास लगभग दस लाख की जमीनी सेना है, क्या ट्रंप अपने कुछ हजार या लाख सैनिक उतार कर उसे खत्म कर पाएंगे ? यह ठीक है युद्ध की शुरुआत में ऐसा लगा था कि अमेरिका और इजरायल एक हफ्ते के अंदर इस युद्ध में विजय पा लेंगे , और ईरान को झुकने पर मजबूर कर देंगे और शुरू में ऐसा लगा भी l क्योंकि ईरान में भीतर घात के चलते उसके प्रमुख और बड़े नेता और सैनिक कमांडर हमले में मारे गए l ईरान एक कट्टर मुस्लिम देश है और ख़ामनेंइ एक कट्टर मुस्लिम शासक थे l कट्टर मुस्लिम परस्त होने के कारण वहां पर महिलाओं को किसी भी प्रकार की स्वतंत्रता नहीं है l और पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं ने इकट्ठा होकर कई बार सड़कों पर प्रदर्शन भी अपनी आजादी के लिए किया l इसलिए यह भी अनुमान लगाया जा सकता है की इजराइल की जासूसी एजेंसी मोसाद को ईरान की महिलाओं से कुछ सहायता मिली हो ?
ट्रंप की वजह से ही यूक्रेन रूस का युद्ध वर्षों से चल रहा है और खाड़ी युद्ध की वजह से विश्व युद्ध की आशंका बढ़ती जा रही है l राष्ट्रपति ट्रंप एक और अपने लिए शांति का नोबेल पुरस्कार की इच्छा मन में लिए हुए घूम रहे हैं वहीं दूसरी ओर विश्व को विश्व युद्ध की ओर धकेल रहे हैं l यह तय है कि अमेरिका अपना सारा जोर लगाने के बाद भी है ईरान से यह युद्ध नहीं जीत पाएगा l और अगर जीतना हैं तो उसे ईरान पर परमाणु बम डालना होगा ,जिसके भयानक विनाशकारी परिणाम होगे l जिसका असर ईरान के साथ खाड़ी के अन्य देशों पर भी पड़ेगा l अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी अमेरिका अलग थलग पड़ जायेगा l
यह युद्ध अभी लगभग एक महीने से भी अधिक चल सकता है l ऐसे में होरमुज स्ट्रेट बंद होने से जहां से दुनिया का लगभग बीस प्रतिशत तेल निर्यात होता है, जिससे तेल, गैस और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति बाधित हो गई है पूरी दुनिया में ऊर्जा का संकट बढ़ेगा और भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता l भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम में और गैस के दाम में सरकार को वृद्धि करनी ही होगी l वास्तव में वर्तमान युद्ध में वैश्विक परिस्थितियों को मोदी सरकार की सफल कूटनीति और विदेशनीति के कारण ही देशवासियों को फिलहाल महंगाई और अनेकों समस्याओं से राहत मिली हुई है l फ्रांस ने सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का आह्वान किया है तो मोदी जी को भी अपने वैश्विक प्रभाव का उपयोग करते हुए मानवता के हित में शांति प्रयासों के लिए पहल करनी चाहिए l

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