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दिल्ली में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है.सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुआ कहा की प्रदूषण कम किया जाना चाहिए.सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा की इसपर राजनीति ना हों और इसका समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए.हालांकि दिल्ली सरकार ने GRAP – 4 लागू कर दिया गया है. आपको बता दे की दिल्ली सरकार ने स्कूलो में विंटर वेकेशन की छुट्टियां 18 नवंबर तक घोषित कर दी हैं. यह पहली बार है की जनवरी में विंटर वेकेशन की छुट्टियां होती थी. प्रदूषण को देखते हुए यह फैसली लिया गया है.


अब सरकार कि तरफ से प्रदूषण को कम करने के लिए कृत्रिम बारिश कराने की योजना बनाई जा रही है.दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा की हम कृत्रिम बारिश कराने के बारे में सोच रहे है.गोपाल राय ने 8 नवंबर को IIT कानपुर की टीम के साथ बैठक की थी. जिसमे यह प्रस्ताव रखा गया. वही संस्थान ने कृत्रिम बारिश का पूरा प्लान सौंप दिया है. जल्द ही प्लान सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा. आपको बताते चले की कृत्रिम बारिश के लिए 40 प्रतिशत बादल होना जरूरी है, इसके बिना कृत्रिम बारिश होना मुश्किल है.गोपाल राय ने यह जानकारी दी की 20 या 21 नवंबर को कृत्रिम बारिश कराई जा सकती है,क्योकि इस दिन आसमान में बादल छा सकते है.

क्या है कृत्रिम बारिश


कृत्रिम बारिश को क्लाउड सीडींग भी कहा जाता है. कुछ पदार्थ जैसे सिल्वर आयोडाइड या पोटेशियम आयोडाइड को विमान के जरिए हाई प्रेशर के साथ बादलों में डाला जाता है. यह पदार्थ वहां कंडेन्सेशन की प्रोसेस को बढ़ावा देता है. जिसमें बारिश या बर्फ बनती है. कभी – कभी इस प्रक्रिया के लिए विस्फोटक का भी यूज किया जाता है.इस प्रक्रिया के लिए प्राकृतिक बादलों का मौजूद होना बेहद आवश्यक है.

कृत्रिम बारिश के फायदे


कृत्रिम बारिश धूल , धुएं और रसायनों समेत प्रदूषकों को कम करने में मदद कर सकती है. इससे धुंध के दूर करने में मदद भी मिल सकती है.जिससे हवा साफ और ज्यादा सांस लेने योग्य हो जाएगी. वायु गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है. वही देखना यह होगा की अगर कृत्रिम बारिश होती है, तो प्रदूषण में कितनी कमी आती है.हमे यह भी सोचना होगा की यह कुछ हद तक ही लाभदायक है.यह इसका स्थायी समाधान नही है.सरकारे एक दूसरे पर आरोप लगाते है, और इसका अभी तक कोई स्थायी समाधान मिलता नजर नही आ रहा है. साल दर साल प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है. इसमें राज्य सरकारों , केन्द्रीय सरकार और एजेंसियाों के साथ मिलकर कोई ठोस कदम उठाने होगें, ताकि आने वाली पीढ़ी को शुद्ध और साफ हवा मिल सके.

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