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पंजाब और हरियाणा में इस बार पराली जलाने के मामलों में भारी गिरावट देखी जा सकती हैं.इस बार प्रदूषण का स्तर बाकी सालों के मुकाबलें कम हैं.दरअसल सरकार द्वारा हर साल कुछ बड़े कदम उठायें जाते है, ताकि प्रदूषण को रोकने में मदद मिले.

पराली जलाने के मामलों में 50 प्रतिशत की कमी

हर साल धान की कटाई के बाद दिवाली के समय प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहता हैं, जिससे दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को दिक्कत महसूस होती हैं.इस साल प्रदूषण का स्तर कम होने के कारण कुछ हद तक राहत मिलती नजर आ रही हैं.


अगर पंजाब की बात करे तो सितंबर से लेकर अक्टूबर तक पराली के 2708 मामलें दर्ज हुए हैं. वही अगर पछले साल की बात करे तो यह आकड़ा 5785 था. अगर 2021 और 2020 की बात करे तो यह आंकड़ा 6085 और 14805 था.हरियाणा के मामलों की बात करे तो सितंबर से लेकर अक्टूबर तक पराली के 813 मामलें दर्ज हुए हैं, जबकि पिछले साल कुल 1360 मामलें आये थे.वही 2021 और 2020 में यह आकड़े तकरीबन 1617 और 1764 मामलें थे.

चलिए जानतें है की किस प्रकार पराली जलाने के मामलों मे कमी आई हैं.

जागरूकता अभियान के चलते

पंजाब और हरियाणा के सरकारों ने पराली न जलाने के लिए फलैक्स बोर्ड के माध्यम से इसका प्रचार किया ताकि पराली जलाने से किस तरह प्रदूषण का ग्राफ बढ़ता हैं. क्या – क्या बीमारीयां हो सकती है, जिससे किसान जागरूक हो सके.

बायो डिकंपोजर कैप्सूल के चलतें


भारतीय कृषि अनुसंधान के वैज्ञानिकों ने 2020 में एक कैप्सूल तैयार किया,यह कैप्सूल 5 जीवाणुओं से मिलकर बना है. यह 4 कैप्सूल के छिड़काव के लिए 25 लीटर का घोल बनाकर एक हफ्ते के अंदर पराली से खाद में तब्दील कर देता हैं.

भारी जुर्माना भी है एक वजह


पंजाब और हरियाणा सरकार दोनों ही पराली जलाने वाले किसानों पर बेहद सख्त हैं अगर कोई किसान पराली जलाता हुआ पाया जा रहा है, तो उनपर कार्रवाई की जा रही है. इसके अलावा इन किसानो पर 2500 से लेकर 15000 तक जुर्माना लगाया जा रहा हैं.

संवादसंग्रहकर्ता : अनुराग त्रिपाठी
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