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स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष लेख

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही स्वामी विवेकानंद के सपनों को साकार करेगा
( अतिवीर जैन * पराग *पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय )

 स्वामी विवेकानंद का कहना था * दुनिया क्या कहेगी ऐसा सोचना ही कमजोरी है , तुम्हें खुद जो अच्छा जान पड़ता है , वही करो जीवन का रहस्य यही है l* उन्होंने आगे कहा * पुराने धर्म में नास्तिक उसे कहते थे जो ईश्वर में विश्वास नहीं करता था परंतु नया धर्म उसे नास्तिक कहता है जिसे स्वयं में विश्वास नहीं *

11 सितंबर 1893 को शिकागो में प्रारंभ हुई विश्व धर्म संसद 27 सितंबर 1893 तक 17 दिन चली l इसमें से 6 दिनों में स्वामी विवेकानंद को बोलने का मौका मिला l स्वामी विवेकानंद ने इन 6 दिनों में हिंदू धर्म की विस्तृत व्याख्या की एवं ईसाइयों द्वारा धर्म परिवर्तन के विषय को लिया l उनका महत्वपूर्ण भाषण 19 सितंबर और 20 सितंबर का रहा l यहाँ बहुत ही संक्षेप में उनके भाषण के कुछ अंश आपको बताते है l उन्नीस सितंबर को स्वामी जी ने अपना भाषण हिंदू धर्म पर दिया l स्वामी जी ने अपने भाषण में कहा – “ऐतिहासिक युग के पूर्व के केवल तीन ही धर्म आज संसार में विद्यमान है -हिंदू धर्म ,पारसी धर्म ,और यहूदी धर्म l ये तीन धर्म अनेकानेक प्रचंड आघातो के पश्चात भी लुप्त ना होकर आज भी जीवित है l यह उनकी आंतरिक शक्ति का प्रमाण है l पर जहां हम यह देखते हैं कि यहूदी धर्म ,ईसाई धर्म को नहीं पचा सका , वरन अपनी सर्वविजयी संतान ईसाई धर्म द्वारा अपने जन्म स्थान से निर्वासित कर दिया गया ,और यह कि केवल मुट्ठीभर पारसी ही अपने महान धर्म की गाथा गाने के लिए अब अवशेष हैं l वहाँ भारत में एक के बाद एक अनेकों धर्म पंथो का उद्भव हुआ और वे पंथ वेदप्रणीत धर्म को जड़ से हिलाते से प्रतीत हुए l पर भयंकर भूकंप के समय समुद्री किनारों की जल तरंगों के समान यह धर्म कुछ समय के लिए इसलिए पीछे हट गया कि वह तत्पश्चात हजार गुना अधिक बलशाली होकर सबको डुबाने वाली बाढ़ के रूप में लौट आए l और जब यह सारा कोलाहल शांत हो गया , तब सारे धर्म संप्रदाय अपनी जन्म दात्री मूल हिंदू धर्म की विराट काया द्वारा आत्मसात कर लिए गए , पचा लिए गए l “
बीस सितंबर को अपने भाषण में स्वामी जी ने ईसाई भारत के लिए क्या कर सकते हैं , पर बोलते हुए कहा – ” आप लोग अपने धर्म उपदेशक अन्य देशों में भेजकर मूर्ति पूजको को अपने धर्म में लाने के लिए तो बड़े उत्सुक हैं , पर जो लोग अन्न बिना मर रहे हैं , उन्हें बचाने के लिए आप कोई उपाय क्यों नहीं करते ? भारतवर्ष में जब भयानक अकाल पड़ा था तो सहस्रों और लाखों हिंदु भूख से पीड़ित होकर मर गए , पर आप सब ईसाइयों ने उनके लिए कुछ नहीं किया l आप लोग सारे हिंदुस्तान में गिरजे बनाते हैं , पर मैं कहूं पूर्वीय देश में धर्म का अभाव नहीं है , उनके यहां तो वैसे ही आवश्यकता से अधिक धरम हैं l वहाँ अभाव है रोटी का , अन्न का l हिंदुस्तान के लाखों भूखे लोग सूखे गले से अन्न अन्न, रोटी रोटी, चिल्ला रहे हैं l वे तो हमसे अन्न मांगते हैं , और हम उन्हें देते हैं पत्थर l भूखों को धर्म का उपदेश देना उनका अनादर और तिरस्कार करना है l “
इस प्रकार स्वामी विवेकानंद ने विश्व धर्म सम्मेलन में भूखे लोगों को लालच देकर धर्म परिवर्तन करवाने वाली ईसाई मिशनरियो को खुले आम दुत्कारने का साहस शिकागो में सात हजार विश्व प्रतिनिधियों के सामने
किया l अगर आज के समय में स्वामी विवेकानंद ने ऐसा बोला होता तो हमारे देश में ही हजारों लोग उनके विरोध में खड़े हो गए होते ?


स्वामी विवेकानंद के आज 161 वे जन्मदिवस पर भी और आजादी के 76 वर्ष होने के बाद भी ईसाई मिशनरियों भारत में हिंदुओं के धर्म परिवर्तन में आज भी लगी हुई है l हमारी सरकार और कानून धर्म परिवर्तन के इस षड्यंत्र को रोकने में नाकाम रहा है l
स्वामी जी की तर्ज़ पर ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक माननीय मोहन भागवत ने भी कहा है कि मुस्लिमों को भारत में डरने की कोई जरूरत नहीं है l हां परंतु अन्य धर्मों को अपनी ही श्रेष्ठता की मानसिकता छोड़नी होगी l हिंदू समाज 1000 वर्षों से अधिक समय तक प्रताड़ित और युद्ध ग्रस्त रहा l विदेशी आक्रांता ने तमाम षड्यंत्र के द्वारा यहां के हिंदुओं का धर्म परिवर्तन किया l यहां के मंदिरों को उजाड़ा यह सब ऐतिहासिक तथ्य हैं l और आज जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बदौलत हिंदू समाज समर्थ हो गया है , जागृत हो गया है तो अब हमें अपनी राष्ट्रीयता और हिंदुत्व के लिये उठ खड़ा होना होगा l ऐसे में आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही एकमात्र संगठन है जो अपनी शिक्षाओं के माध्यम से देश में हिंदू समाज में जागृति ला सकता है और स्वामी विवेकानंद के सपनों को पूरा कर सकता है l
स्वामी विवेकानंद को अपने देश की मिट्टी और उसकी संतानों से सच्चा प्रेम था l वे देश की तरुण पीढ़ी को बलवान, शक्तिमान देखना चाहते थे l देश के तरुणों को संबोधित कर कहा करते थे ” मेरे नवयुवक मित्रों बलवान बनो l भगवत गीता के स्वाध्याय से पहले अपने शरीर और मन को दृढ़ और पुष्ट करो l यदि तुम्हारी रगे और पुट्ठों अच्छी तरह पुष्ट होंगे तो तुम भागवत गीता पर भी अधिक अच्छी तरह आचरण कर सकोगे l याद रखो गीता का उपदेश कायरों को नहीं दिया गया था l अर्जुन जैसे वीर पराक्रमी और साहसी क्षत्रिय को दिया गया था l ” स्वामी विवेकानंद को अपने देश के प्राचीन आदर्शों पर बड़ी श्रद्धा थी l उन्होंने अपने एक भाषण में कहा था ” प्यारे देशवासियों वीर बनो और ललकार कर कहो कि मैं भारतीय हूं l भारत मेरा प्राण है, मेरा जीवन है l प्रत्येक भारतीय मेरा भाई है l अनपढ़ भारतीय ,निर्धन भारतीय, ऊंची जाति का भारतीय , निचली जाति का भारतीय , सब मेरे भाई है l उनकी प्रतिष्ठा मेरी प्रतिष्ठा हैं l उनका गौरव ,मेरा गौरव हैं l “
स्वामी विवेकानंद से प्रेरित हाेकर सन 1925 में डॉक्टर केशवराम बलिराम हेडगवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की l जिसके माध्यम से देश के युवाओं को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने का कार्यक्रम योग के माध्यम से निरंतर किया जा रहा है l
स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था l आपके पिता का नाम विश्वनाथ और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था l आपने अपना पार्थिव शरीर 7 जुलाई 1902 को छोड़ दिया l इस प्रकार कुल 39 वर्ष की आयु में आप सदा के लिए अमर हो गए l ऐसे थे स्वामी विवेकानंद जी और उनका देश के प्रति प्रेम l आइए उनके 161 वे जन्मदिन पर उन्हें नमन करें और उनके बताए हुए रास्ते पर चलें l

इंजी. अतिवीर जैन * पराग *
पूर्व उपनिदेशक, रक्षा मंत्रालय
कवि, लेखक , व्यंग्यकार एवं
साहित्यकार,स्वतंत्र पत्रकार ,
स्तंभकार,सामाजिक कार्यकर्ता
मोबाइल 94569 66722 what’s up
232/1डी,शिवलोक ,
कंकर खेड़ा, मेरठ केंट-250001

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