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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि जैन सिर्फ एक धर्म ही नहीं बल्कि जीवन शैली है। यह एक संस्कृति है इसकी उत्पत्ति अनादि काल से है। वे आ ज यहां पूर्वी दिल्ली के राजधानी एंक्लेव में जैन संत प्रवर्तक श्री सुभद्र मुनि के दर्शन के पश्चात एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर प्रवर्तक श्री सुभद्र मुनि ने कहा कि
जिस प्रकार नमक का धर्म खारापन, पानी का धर्म तरलता, शीतलता, अग्नि का धर्म ऊष्मा एवं प्रकाश तथा पृथ्वी की दृढ़ता है वैसे ही मानव का धर्म मानवता होता है। अपने इस धर्म से निरपेक्ष होने पर उनकी उपयोगिता और महत्ता स्वतः नष्ट हो जाती है।


कार्यक्रम का आयोजन भगवान महावीर 2550 वे निर्वाण महोत्सव समिति के मुख्य संयोजक सत्यभूषण जैन ने किया था।
कोविंद ने कहा कि आज महावीर भगवान के निर्वाण के 2550 वर्ष बाद भी अगर उनके सिद्धांतों की प्रासंगिकता है तो यह अपने आप में सिद्ध करता है कि जैन धर्म जीवन का एक मूल आधार है। उन्होंने कहा कि मेरा स्वयं का मानना है कि अगर मुझे दूसरा जन्म मिलता है तो मैं चाहूंगा कि मैं जैन परिवार में जन्म लूं।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि जैन साधुओं का आचरण तथा व्यव

हार बहुत ही प्रशंसनीय तथा अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि हमें महावीर भगवान के सिद्धांतों को पढ़ना ही नहीं चाहिए बल्कि अपने जीवन में उन्हें धारण भी करना चाहिए।
रामनाथ कोविंद ने कहा कि जैनत्व केवल धर्म ही नहीं बल्कि एक ऐसी जीवनशैली है जो इंसान को सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी के 2550 वे निर्वाण दिवस वर्ष में हम सबकी जिम्मेदारी और कर्तव्य बनता है कि उनके संदेशों को केवल मंदिरों व कार्यक्रमों तक ही सीमित न रखें बल्कि जन जन तक पहूंचाने का प्रयास करें।


स्थानकवासी समाज के प्रमुख संत प्रवर्तक श्री सुभद्र मुनि ने कि
जैसा कि हम जानते हैं कि धर्म एवं राजनीति का मेल घातक माना जाता है। इसे तथाकथित पढ़े लिखे लोगों द्वारा भ्रम के रूप में लाया गया है। इसे हम एक भय के रूप में पाल पोश रहे हैं इसके सामने गांधीजी के इस सम्यक दर्शनपूर्ण आग्रह की भी परवाह नहीं की कि “धर्म विहीन राजनीति” मधुमक्खी के छत्ते की तरह है जिसमें मधु को कुछ नहीं होता, किंतु वहाँ काटने वाले विषैले बर्रे के झुंड जरूर होते हैं। समस्या का हल भ्रम द्वारा नहीं अपितु केवल सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान धर्म एवं राजनीति के स्वरूप को सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की जरूरत है। भ्रमित ज्ञान के आधार पर हम धर्म एवं राजनीति और इनके मेलजोल पर सम्यक निश्चय नहीं कर सकते। इसके लिये धर्म और राजनीति तथा इनके परस्पर संबंधों का ऐतिहासिक संदर्भ में सही विवेचन करना आवश्यक है।


भगवान महावीर 2550 वे निर्वाण महोत्सव समिति के मुख्य संयोजक सत्यभूषण जैन ने बताया कि यह वर्ष अहिंसा वर्ष के रूप में मनाया जाएगा तथा 12 नवंबर 23 से 1 नवंबर 24 तक पूरे वर्ष देश भर में भगवान महावीर व जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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